dil ki baat

दिल है कि मानता नहीं

7 Posts

61 comments

anilsaxena


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

दिल्ली विधान सभा चुनाव : कुछ ऐतिहासिक बातें

Posted On: 11 Feb, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

13 Comments

भाजपा को एक सबक

Posted On: 8 Feb, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

घबराई क्यों है भाजपा ?

Posted On: 30 Jan, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

6 Comments

कसाब को फांसी : एक तीर से कई निशाने

Posted On: 22 Nov, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

15 Comments

क्या अन्ना केजरीवाल से ज्यादा कारगर सिद्ध होंगे ?

Posted On: 7 Nov, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

8 Comments

बदलाव की आहट

Posted On: 23 Oct, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

18 Comments

Posted On: 19 Oct, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: RaJ RaJ

आदरणीय अनिल जी, सादर ! ""आज बदलाव की मशाल थामे सधे क़दमों से जिस प्रकार आम जन आगे बढ़ रहा है और देश को लूटने वाले भ्रष्ट नेता पीछे हट रहे है तो इससे तो यही लगता है कि पीछे हटते-हटते दीवार से टकराना निश्चित है, जहाँ से कोई रास्ता नहीं बचेगा. अब उम्मीद कि जानी चाहिए कि देर से ही सही लेकिन भ्रष्टाचार के अँधेरे में स्वच्छ राजनीति का दीपक जरूर जलेगा""" बिलकुल ठीक कहा है आपने ! औषधि का असर और परिवर्तन की गति थोड़ी धीमी जरुर होती है,. पर निष्फल नहीं होती ! बहुत से लोग इस परिवर्तन को इसलिए नकार रहे हैं क्योंकि वे किसी चमत्कार की उम्मीद पाले बैठे हैं ! बहुत से लोग इस परिवर्तन को इसलिए नकार रहे हैं क्योंकि वे अत्यधिक निराशावादी हो गए हैं ! बहुत से लोग इस परिवर्तन को इसलिए नकार रहे हैं क्योंकि वे स्वयं इस भ्रष्ट व्यवस्था के अंग हैं ! हमें यह समझना चाहिए की हम आम जनता हैं ! राजनीति के विशेषग्य नहीं! आज राजनीती शब्द छल-कपट और धोखेबाजी का पर्यायवाची शब्द बन गया है ! आज जो लोग श्री केजरीवाल के प्रति नकारात्मक विचार रख रहे हैं उन्हें यह सोचना चाहिए की किसी भी कार्य के होने में कुछ न कुछ समय लगता है ! वह समय इन्हें भी मिलना चाहिए ! अपने घर की सुरक्षित चारदीवारी में बैठ कर चाय की चुस्की लेते हुए किसी की आलोचना करना बहुत सहज है, पर प्राण हथेली पर लेकर असीम शक्तिसंपन्न लोगों के विरुद्ध सड़क पर खुलेआम आवाज उठाना बहुत कठिन है ! हमें चाहिए की श्री केजरीवाल या उनके जैसे लोगों का समर्थन नहीं कर सकते तो आलोचना से भी बचें ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959




latest from jagran